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टेलर और बुटीक के लिए GST बिलिंग: आसान गाइड

टेलरिंग बिज़नेस को GST कब चाहिए, सही GST बिल में क्या होता है, CGST और SGST कैसे बँटते हैं, और अलग बिलिंग ऐप के बिना बिल कैसे बनाएँ।

VirtueTailor4 मिनट में पढ़ें

छोटा जवाब

टेलरिंग बिज़नेस का सालाना टर्नओवर सर्विस की सीमा पार करते ही उसे GST रजिस्ट्रेशन लेना होता है — ज़्यादातर राज्यों में ₹20 लाख, विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹10 लाख — या चाहे तो पहले भी ले सकता है। GST बिल में आपका GSTIN, सीरियल नंबर, तारीख, कस्टमर, हर लाइन और उसकी टैक्स वाली रकम, और अपने राज्य के अंदर की बिक्री पर CGST और SGST में बँटा टैक्स दिखता है। अपने काम पर लगने वाला रेट अपने CA से पक्का करें।

समस्या

हाथ से लिखे बिल, कैलकुलेटर पर टैक्स

हाथ से लिखी बिल बुक, एक अलग बिलिंग ऐप, और काउंटर पर ही टैक्स का हिसाब। तिमाही के आखिर में कुछ भी उससे मेल नहीं खाता जो अकाउंटेंट को चाहिए।

VirtueTailor के साथ

GST बिल सीधे ऑर्डर से बने

  • CGST और SGST वाले GST इनवॉइस
  • नंबर क्रम से, कभी हाथ से टाइप नहीं
  • बिल WhatsApp पर शेयर
  • पेमेंट और बैलेंस उसी बिल पर
  • रजिस्टर्ड नहीं हैं तो बिना GST का सादा बिल
  • अकाउंटेंट के लिए Excel एक्सपोर्ट

क्या टेलर को GST रजिस्ट्रेशन चाहिए?

जब बिज़नेस का सर्विस से कुल सालाना टर्नओवर सीमा से ऊपर जाता है, तब GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो जाता है — ज़्यादातर राज्यों में ₹20 लाख और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹10 लाख। इससे नीचे रजिस्ट्रेशन अपनी मर्ज़ी है। कुछ दुकानें फिर भी रजिस्टर करवाती हैं क्योंकि कंपनी और यूनिफॉर्म वाले कस्टमर GST इनवॉइस माँगते हैं। जो दुकान रजिस्टर्ड नहीं है, वो सादा बिल देती है जिसमें न GST होता है न GSTIN।

GST बिल में क्या-क्या होना चाहिए?

  • आपके बिज़नेस का नाम, पता और GSTIN
  • एक अलग इनवॉइस नंबर, फाइनेंशियल ईयर के लिए क्रम से
  • इनवॉइस की तारीख
  • कस्टमर का नाम (और बिज़नेस कस्टमर हो तो उसका GSTIN)
  • हर लाइन: क्या काम हुआ, उसका HSN या SAC कोड, और टैक्स वाली रकम
  • हर लाइन पर GST रेट और टैक्स की रकम
  • कुल रकम, और सप्लाई की जगह

CGST और SGST: टैक्स दो हिस्सों में क्यों बँटता है

अपने ही राज्य के अंदर की बिक्री पर GST दो बराबर हिस्सों में लगता है — सेंट्रल GST और स्टेट GST। अगर किसी लाइन पर रेट 5% है, तो बिल में 2.5% CGST और 2.5% SGST दिखता है। दूसरे राज्य के कस्टमर को बिक्री पर इसकी जगह पूरे रेट पर IGST लगता है। ज़्यादातर सिलाई की दुकानें अपने राज्य में ही बेचती हैं, इसलिए उनके ज़्यादातर बिलों में CGST और SGST दिखता है।

ऑर्डर से ही बिल बनाएँ

ऑर्डर में पहले से कस्टमर, कपड़े और हर चीज़ का दाम होता है — सिलाई, मग्गम का काम, अस्तर, हुक। बिल वहीं से एक स्टेप में बनना चाहिए, किसी दूसरे ऐप में सब दोबारा टाइप करके नहीं। पहले दिया गया एडवांस बिल पर दिखता है, और बैलेंस भी।

  1. अपनी GST जानकारी एक बार डालें

    GSTIN, बिज़नेस का नाम और पता, और आप जो रेट लगाते हैं।

  2. ऑर्डर से बिल बनाएँ

    लाइनें, टैक्स वाली रकम, CGST और SGST, जो बुक हुआ उसी से भर जाते हैं।

  3. WhatsApp पर शेयर करें

    कस्टमर को अपने फ़ोन पर सही बिल मिलता है; खोया बिल आपको कभी दोबारा प्रिंट नहीं करना पड़ता।

  4. अकाउंटेंट के लिए एक्सपोर्ट करें

    उस समय की रिपोर्ट Excel में एक्सपोर्ट करें और रिटर्न के लिए दे दें।

आम गलतियाँ

  • इनवॉइस नंबर छोड़ देना, या साल के बीच में दोबारा शुरू कर देना।
  • जो दाम कस्टमर को सब मिलाकर बताया था, उसके ऊपर GST जोड़ देना।
  • काउंटर पर डिस्काउंट देना और उसे बिल पर न लिखना।
  • बिल एक ऐप में और पेमेंट दूसरे में रखना, जिससे हिसाब कभी मिलता ही नहीं।

इसी परेशानी के कैश वाले हिस्से के लिए देखें एडवांस और बैलेंस का हिसाब।

सवाल

टेलरिंग शॉप के लिए GST रजिस्ट्रेशन की सीमा क्या है?

सर्विस देने वाले बिज़नेस के लिए, ज़्यादातर राज्यों में ₹20 लाख और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹10 लाख सालाना टर्नओवर से ऊपर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। अपने केस के लिए CA से पूछें।

GST बिल में CGST और SGST क्यों दिखता है?

अपने ही राज्य के अंदर की बिक्री पर GST बराबर-बराबर सेंट्रल GST और स्टेट GST में बँटता है। दूसरे राज्य में बिक्री पर इसकी जगह पूरे रेट पर IGST लगता है।

क्या टेलरिंग सॉफ्टवेयर GST इनवॉइस बना सकता है?

हाँ। VirtueTailor ऑर्डर से ही CGST और SGST वाले GST इनवॉइस बनाता है, एडवांस और बैलेंस दिखाता है, और बिल WhatsApp पर शेयर करता है।

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